राणा कुंभा
राणा कुंभा / Rana kumbha
महाराणा कुंभा 1433 ईस्वी में मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठे उनके पिता का नाम महाराणा मोकल था तथा उनकी माता सौभाग्य देवी थी
महाराणा कुंभा के शासनकाल को साहित्य व कला व स्थापत्य कला का स्वर्ण काल माना जाता है
महाराणा कुम्भा राजगद्दी पर बैठने के बाद उसने अपने पराक्रम द्वारा ना केवल आंतरिक और बाह्य कठिनाइयों का सफलतापूर्वक सामना किया अपनी और सांस्कृतिक उपलब्धियों द्वारा मेवाड़ के गौरव को बढ़ाया
मेवाड़ - मालवा संबंध ___ मेवाड़ और मालवा दोनों एक दूसरे के पड़ोसी राज्य थे ओर यहाँ के शासक अपने-अपने राज्यों की सीमाओं का विस्तार करना चाहते थे इन कारण दोनों राज्यों के बीच संघर्ष होना आवश्यक था किंतु दोनों के बीच संघर्ष का तत्कालीन कारण मालवा के सुल्तान द्वारा कुंभा के विद्रोही सरदारों को अपने यहां शरण देना बना महाराणा कुंभा के पिता मोकल के हत्यारे महापा पवार ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के पास शरण ले रखी थी कुंभा ने सुल्तान को पत्र लिखकर मेहता पवार की मांग की जिसे सुल्तान द्वारा अस्वीकार कर दिया गया इसलिए कुम्भा ने मालवा पर आक्रमण करने का फैसला किया
महाराणा कुंभा के पिता मोकल के हत्यारे मेहता पवार को मालवा ( मांडू) के सुल्तान महमूद खिलजी मैं शरण दी तथा इसी कारण महाराणा कुंभा ने 1437 में मालवा या मांडू पर आक्रमण किया
1437 में महाराणा कुंभा और मालवा के महमूद खिलजी के बीच सारंगपुर ( मध्य प्रदेश) के युद्ध में महाराणा कुंभा विजय रहा
मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को महाराणा कुंभा ने बंदी बनाकर 6 माह तक चित्तौड़गढ़ में रखा और और 6 माह बाद सुल्तान को बिना शर्त ही रिया कर दिया
महमूद खिलजी ने अपनी पहली पराजय का बदला लेने के लिए 1443 ईस्वी में कुंभलगढ़ पर आक्रमण कर दिया कुंभा ने किले के दरवाजे के नीचे बाण माता के मंदिर के पास दीप सिंह के नेतृत्व में मजबूत सेना नियुक्त की तथा 7 दिन तक चले भयंकर संघर्ष में दीप सिंह व उसके साथी की मृत्यु के बाद ही मंदिर पर शत्रु सेना का अधिकार हुआ
सारंगपुर( मध्य प्रदेश) के युद्ध में विजय के पश्चात महाराणा कुंभा ने विजय स्तंभ या कीर्ति स्तंभ का निर्माण करवाया
विजय स्तंभ या कीर्ति स्तंभ __
चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर स्थित 9 मंजिला और 122 फीट ऊंची है विजय स्तंभ का निर्माण महाराणा कुंभा ने सारंगपुर युद्ध में महमूद खिलजी पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष में बनवाया था जो चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है
विजय स्तंभ का निर्माणकर्ता महाराणा कुंभा को माना जाता है जबकि इसके वास्तुकार जेता नापा पुन्जा है| विजय स्तंभ का निर्माण महाराणा कुंभा ने 1440 से 1448 तक करवाया था तथा 122 फीट ऊंचा और 30 फीट चौड़ा है तथा इसमें 127 सीढ़ियां है और यह विष्णु भगवान को समर्पित है
विजय स्तंभ की आठवीं मंजिल पर अल्लाह शब्द लिखा हुआ है और विजय स्तंभ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राजस्थान पुलिस का प्रतीक चिन्ह है|| विजय स्तंभ भारत का एकमात्र ऐसा स्तंभ है जो अंदर ओर बहार हिंदू मूर्तियों से लगा हुआ है इसलिए गजट महोदय ने इसे मूर्तियों का अजायबघर कहां है तथा इससे मूर्तियों का शब्दकोश या विश्वकोश और अनमोल खजाना भी कहा जाता है
विजय स्तंभ की 9वीं मंजिल पर कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति लगी हुई है जिसकी रचना अत्री व महेश ने की थी इस प्रशस्ति में महाराणा कुंभा के मालवा विजय और राणा कुंभा के संगीत ग्रंथों कुंभा की उपाधियों की जानकारी मिलती है
कीर्ति स्तंभ को या विजय स्तंभ को कर्नल जेम्स टॉड ने क़ुतुब मीनार से कथा फर्गुसन ने रोम का टार्जन से भी अच्छे बताया है
मालवा का महमूद खिलजी 1456 ईस्वी में गुजरात के कुतुबुद्दीन से चंपानेर ( मध्य प्रदेश) की संधि करता है जोकि असफल रहती है
महाराणा कुंभा ने 1457 ईस्वी में बदनोर भीलवाड़ा के युद्ध में मालवा के या मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी को पराजित कर दीया इसी विजय के उपलक्ष में महाराणा कुंभा ने बदनोर में कुशाला माता मंदिर का निर्माण करवाया था
महाराणा कुंभा की सांस्कृतिक उपलब्धियां
महाराणा कुंभा को आधुनिक स्थापत्य कला का जनक और राजस्थान का शाहजहां जाता है
कवि श्यामल दास द्वारा लिखित ग्रंथ वीर विनोद के अनुसार मेवाड़ में स्थित 84 किलो में से 32 किलो का निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था
राजस्थान में सबसे ज्यादा किलो का निर्माण और पुनर्निर्माण महाराणा कुंभा द्वारा करवाया गया था जो निम्न है
1 _ कुंभलगढ़ ( राजसमंद )
2_ मचान गढ़( राजसमंद)
3_ बैरागढ़ (दिलवाड़ा )
4_बसंतगढ़ (सिरोही )
5अचलगढ़ (सिरोही)
महाराणा कुंभा ने अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया जो कि निम्न हैं
1_ श्रंगार चवरी( चित्तौड़गढ़ )__कुंभा की पुत्री रामा देवी के विवाह के उत्सव पर निर्माण करवाया था
2_ कुशाला माता( बदनोर भीलवाड़ा )
3_ मीरा मंदिर ( चित्तौड़गढ़) _ इस मंदिर में मीरा पूजा करती थी इस कारण इसे मेरा मंदिर का जाता है
4_ रणकपुर जैन मंदिर (पाली) _इस मंदिर का वास्तुकार दीपक था
महाराणा कुंभा की उपाधियां
1_ अभिनव भर्ताचार्य _ संगीत ग्रंथों व नाटकों का रचिता होने कारण
2_ हिंदूसुरताण__ मुस्लिम शासकों द्वारा दी गई उपाधि
3_हाल गुरु__ गिरी दुर्ग का निर्माता के कारण
4 छाप गुरु _छापामार युद्ध के कारण
5_चाप गुरु_ धनूर विद्या के कारण
6_दान गुरु
7_महाराजाधिराज
8_ राणो रासो _ विद्वानों का आश्चर्य दाता के कारण
9_ शेल गुरु
10_ राजगुरु
महाराणा कुंभा संगीत ग्रंथों का भी रचिता होने के कारण महाराणा कुंभा ने अनेक ग्रंथ लिखे जो निम्न है
महाराणा कुंभा के संगीत ग्रंथ
1_ संगीत _ इसे ग्रंथों का सिरमौर भी कहा जाता है
2_संगीत मीमांसा
3_कामराज रतिसार
4_ हरिवार्तिक
5_ सुधा प्रबंध
6_संगीत रत्नाकर
सभी ग्रंथ वर्तमान में अनूप संस्कृत पुस्तकालय बीकानेर में रखे हुए हैं
राणा कुंभा का संगीत गुरु सारंग व्यास था
महाराणा कुंभा का प्रधान शिल्पी मंडन था जिसके द्वारा निम्न ग्रंथ लिखे
1_ देव मूर्ति प्रकरण _मूर्ति कला से संबंधित
2_राजवल्लभ _राजकीय आवाज से संबंधित
3_ रूप मंडल
4_वास्तु मंडल
5_वास्तु शास्त्र
6_ प्रसाद मंडल
महाराणा कुंभा की 1468 में उसके पुत्र उदा ने कुंभलगढ़ में स्थित कटार गढ़ में हत्या कर दी कटार घोपकर
मेवाड़ के सिसोदिया वंश का राजवंश
1• राणा हमीर 1326 _ 1364
2• राणा क्षेम सिंह 1364 _ 1382
3• राणा लाखा 1382 _ 1421
4• राणा मोकल 1421_ 1433
5• राणा कुंभा 1433 _ 1468
6• राणा उदा 1468 _1473
7• राणा राय सिंह 1473 _ 1509
8• राणा सांगा /संग्राम सिंह 1509 _ 1528
9• राणा रतन सिंह 1528 _ 1531
10• राणा विक्रमादित्य 1531 _ 1536
11•बनवीर 1536 _1537
12•राणा उदय सिंह द्वितीय 1537 _ 1572
13•महाराणा प्रताप 1572 _ 1597
14•राणा अमर सिंह 1597 _ 1620
15•राणा करण सिंह 1620 _ 1628
16•जगत सिंह 1628 _1652
17• राणा राज सिंह 1652 _ 1682
18•राणा राज सिंह 1682 _ 1696
19•राणा अमर सिंह द्वितीय 1696 _1710
20• राणा संग्राम सिंह दितीय 1710 _ 1734
21• राणा जगत सिंह द्वितीय 1734 _1751
22•राणा प्रताप सिंह दितीय 1751 _1754
23• राणा राज सिंह दितीय 1754 _ 1762
24•राणा हरि सिंह वित्तीय 1762 _ 1772
25•राणा हमीर सिंह वित्तीय 1772 _ 1778
26• राणा भीम सिंह 1778 _ 1828
27•राणा जवान सिंह 1828 _ 1838
28•राणा सरदार सिंह 1838 _ 1842
29• राणा स्वरूप सिंह 1842 _ 1861
30• राणा शंभू सिंह 1861 _ 1874
31•राणा सज्जन सिंह 1874 _ 1884
32• फतेह सिंह 1884 _ 1930
33• भूपाल सिंह 1930 1947
Note• राणा भूपाल सिंह इस वंश का अंतिम शासक थे


Hi
ReplyDelete